प्रधानमंत्री कार्यालय में बुधवार को एक अहम बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आमने-सामने बैठे। यह बैठक लगभग डेढ़ घंटे चली और मुख्य विषय था—चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर (CIC) व 8 इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स की नियुक्ति।
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान राहुल गांधी ने चयनित उम्मीदवारों की सामाजिक पृष्ठभूमि पर गंभीर आपत्ति जताई। कुछ सप्ताह पहले राहुल ने सरकार से इन उम्मीदवारों और आवेदकों की जातिगत जानकारी मांगी थी, जिसे बुधवार की बैठक से पहले उन्हें उपलब्ध कराया गया।
राहुल का आरोप: चयनित सूची में SC/ST–OBC–अल्पसंख्यक लगभग नदारद
प्राप्त जानकारी के अनुसार—
आवेदकों की सूची में केवल 7% लोग पिछड़े समुदायों से थे।
चयनित सूची में महज एक व्यक्ति ही पिछड़े वर्ग से है।
राहुल ने इसे गंभीर असंतुलन बताते हुए नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने समिति को लिखित असहमति पत्र सौंपते हुए चयन के मानदंडों और पारदर्शिता पर और जानकारी मांगी।
CIC चयन समिति में मोदी अध्यक्ष, राहुल सदस्य
सूचना आयोग की नियुक्तियों के लिए 3-सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति होती है—
प्रधानमंत्री (अध्यक्ष)
नेता प्रतिपक्ष (सदस्य)
प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री (सदस्य)
समिति की सिफारिशों के आधार पर राष्ट्रपति नियुक्ति करते हैं।
वर्तमान में आयोग में केवल दो इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स कार्यरत हैं, जबकि 10 में से 8 पद खाली हैं। CIC का पद भी पिछले तीन महीनों से खाली है। पूर्व CIC हीरालाल सामरिया सितंबर में रिटायर हुए थे।
पहले भी उठते रहे हैं सवाल
यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने चयन प्रक्रिया पर असहमति जताई हो।
2023 में सामरिया की नियुक्ति पर अधीर रंजन चौधरी ने पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया था।
2020 में भी चयन समिति में विपक्ष ने कुछ नियुक्तियों का विरोध किया था, लेकिन केंद्र ने उन्हें मंज़ूरी दे दी थी।
राहुल के बढ़े अधिकार: कई प्रमुख नियुक्तियों में सीधी भूमिका
नेता प्रतिपक्ष के रूप में राहुल गांधी अब कई संवैधानिक नियुक्तियों की चयन समितियों का हिस्सा हैं—
चीफ इलेक्शन कमिश्नर और चुनाव आयुक्त
CVC, CBI–ED प्रमुख
लोकपाल
NHRC चेयरपर्सन
CIC तथा इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स
इन समितियों में प्रधानमंत्री अध्यक्ष होते हैं, लेकिन राहुल की सहमति या असहमति अब औपचारिक रूप से दर्ज की जाती है।
इसके अलावा राहुल लोक लेखा समिति (PAC) के भी अध्यक्ष हैं, जो सरकार के खर्च और कार्यप्रणाली की जांच करती है।
गांधी परिवार का तीसरा नेता विपक्ष
राहुल गांधी अपने 20 साल के राजनीतिक सफर में पहली बार संवैधानिक पद पर हैं। वे गांधी परिवार के तीसरे सदस्य हैं जो इस पद पर पहुंचे—
राजीव गांधी (1989–90)
सोनिया गांधी (1999–2004)
राहुल गांधी (2024–वर्तमान)
2024 के चुनाव में कांग्रेस 99 सीटों के साथ सबसे बड़ा विपक्षी दल बनी और 10 साल बाद लोकसभा में यह पद फिर भरा गया।