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कर्ज मांगने में अब शर्म आती है

इस्लामाबाद। 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश की बढ़ती विदेशी कर्ज निर्भरता को लेकर खुलकर चिंता जताई है। उन्होंने राजधानी इस्लामाबाद में कारोबारी नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि बार-बार विदेशों में कर्ज मांगना उनके लिए आत्मसम्मान का बोझ बन गया है।

शहबाज ने कहा, “जब फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और मैं दुनियाभर में पैसे मांगने जाते हैं, तो हमें शर्म आती है। कई बार हमें उनकी शर्तें माननी पड़ती हैं, और ‘ना’ कहना संभव नहीं होता।”

उन्होंने कहा कि कर्ज का बढ़ता बोझ पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा पर असर डाल रहा है और अब देश को वैकल्पिक आर्थिक रास्ते तलाशने की जरूरत है।

आर्थिक संकट की तस्वीर

  • पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय मदद पर काफी निर्भर है।

  • चीन को “हर मौसम का दोस्त” बताते हुए, शहबाज ने सऊदी अरब, UAE और कतर का भी समर्थन बताया।

  • पाकिस्तान में गरीबी बढ़कर लगभग 45% और बेरोजगारी 7.1% हो चुकी है, करीब 80 लाख लोग बेरोजगार हैं।

  • देश का कुल सरकारी कर्ज मार्च 2025 तक 76,000 अरब रुपये से अधिक हो गया है, जो चार साल में लगभग दोगुना हुआ।

विदेशी मदद

  • चीन ने पाकिस्तान में 60 अरब डॉलर का निवेश किया और कर्ज की समय-सीमा बढ़ाई।

  • सऊदी अरब ने 2024-25 में 3 अरब डॉलर जमा कराए और 1.2 अरब डॉलर तेल उधार दिया।

  • UAE ने 2 अरब डॉलर का कर्ज चुकाने की समयसीमा बढ़ाई और 10-25 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया।

  • कतर ने 3 अरब डॉलर के निवेश की योजना बनाई, जो विमानन, खेती और पर्यटन क्षेत्रों में होगा।

उद्योग और विकास

  • पाकिस्तान का निर्यात मुख्यतः कपड़ा उद्योग पर निर्भर है।

  • सॉफ्टवेयर, कृषि और पशुपालन में विकास की संभावना है, लेकिन कमजोर ढांचा और कम उत्पादकता बाधा बने हुए हैं।

शहबाज का बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान IMF से मदद और पुराने कर्ज को रोलओवर करने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार, देश की आर्थिक स्थिति को सुधारने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए अब नए आर्थिक रास्ते अपनाना आवश्यक है।


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