
गुरुवार रात को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के कई ठिकानों को निशाना बनाते हुए एयर स्ट्राइक की।
TTP चीफ को मारने का दावा और खंडन
- पाकिस्तान का दावा: पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तानी एयरफोर्स ने TTP चीफ मुफ्ती नूर वली मेहसूद को मारने का दावा किया है।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, महसूद पूर्वी काबुल में एक ठिकाने पर मौजूद था, और उसकी कार और गेस्ट हाउस को निशाना बनाया गया।
- तालिबान का बयान: तालिबान सरकार के मुख्य प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि विस्फोटों में किसी के घायल होने की कोई रिपोर्ट नहीं है।
- मेहसूद का खंडन: वहीं, टोलो न्यूज़ ने मेहसूद का एक ऑडियो मैसेज मिलने का दावा किया है, जिसमें उसने कहा है कि उस पर कोई हमला नहीं हुआ है।
भारत दौरे के बीच हुई एयर स्ट्राइक
यह एयर स्ट्राइक ऐसे समय में की गई है जब तालिबान सरकार के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी सात दिन की भारत यात्रा पर आए हुए हैं। उनकी यह यात्रा गुरुवार को ही शुरू हुई है।

TTP प्रमुख मुफ्ती नूर वली मेहसूद का परिचय
मुफ्ती नूर वली मेहसूद का जन्म 26 जून 1978 को पाकिस्तान के दक्षिणी वजीरिस्तान के गुड़गांव इलाके में हुआ था। वह पाकिस्तान के सर्वाधिक वांछित आतंकवादियों में से एक है और TTP प्रमुख मुल्ला फजलुल्लाह की मौत के बाद उसने संगठन की कमान संभाली। मेहसूद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का चौथा अध्यक्ष है।
संगठनात्मक पृष्ठभूमि
- 2003: डिफेंस एक्सपर्ट्स के अनुसार, मेहसूद इस साल एक जिहादी गुट में शामिल हुआ, जो पाकिस्तान के कबायली इलाकों में तालिबान शासन के समय उभरा था।
- 2007: वह बैतुल्लाह महसूद के नेतृत्व में गठित TTP का हिस्सा बन गया।
- 2013: नूर वली मेहसूद कराची में TTP की गतिविधियों की देखरेख करने लगा। वह पूरे पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों के लिए पैसे जुटाने के मकसद से जबरन वसूली और अपहरण के नेटवर्क का नेतृत्व करता था।
- 'तालिबान अदालतें': उसने कराची में पश्तूनों को निर्देश दिया कि वे अपने विवाद TTP की 'तालिबान अदालतों' में सुलझाएं। जो लोग इस आदेश का पालन नहीं करते थे, उन्हें हिंसा का सामना करना पड़ता था।
ऐसा माना जाता है कि मेहसूद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच आवागमन करता रहता था और उसके पास पाकिस्तानी नागरिकता है।
TTP: पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा
2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से TTP ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध छेड़ रखा है। पिछले बारह वर्षों में TTP को पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा आतंकवादी खतरा माना जा रहा है।
- सीमा पार से हमला: पाकिस्तान का आरोप है कि TTP के लड़ाके सीमा पार अफगानिस्तान से प्रशिक्षण लेकर पाकिस्तान लौटते हैं और हमला करते हैं। हालांकि, तालिबान दावा करता है कि वह TTP का समर्थन नहीं करता है।
- आतंकवादी हमले बढ़े: पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज के अनुसार, देश में आतंकवादी हमले 2015 के बाद सबसे ज़्यादा हो गए हैं, और TTP इसकी मुख्य वजह है।
वैश्विक प्रभाव: इन हमलों के कारण वैश्विक आतंकवाद सूचकांक में पाकिस्तान आतंकवाद प्रभावित देशों की सूची में दूसरे नंबर पर पहुँच गया है।

TTP का गठन: अमेरिकी हमले और पाकिस्तान के समर्थन का जवाब
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का गठन 2007 में, बैतुल्लाह मेहसूद द्वारा 13 विद्रोही गुटों को मिलाकर किया गया था। इस संगठन के बनने की मुख्य वजह अमेरिका के नेतृत्व में हुए युद्ध और पाकिस्तान की नीति थी:
- अमेरिकी हमला और लड़ाकों का पलायन: 2001 में अमेरिका ने जब अफगानिस्तान पर हमला किया, तो कई लड़ाके पाकिस्तान के कबाइली इलाकों में छिप गए।
- पाकिस्तान का समर्थन: पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर इस हमले का समर्थन किया, जिससे कबायली इलाकों के विद्रोही गुट नाराज़ हो गए।
TTP के लक्ष्य और हमले
गठन के बाद, TTP ने पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर हिंसा फैलाई:
- शरिया कानून लागू करना: TTP ने कबायली इलाकों में शरिया कानून लागू किया।
- हमले: उन्होंने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, अफगानिस्तान में विदेशी सैनिकों, यूनिवर्सिटीज़, धार्मिक नेताओं और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया। TTP ने पाकिस्तान के बड़े शहरों में भी हमले किए।
TTP का कायम रहना
पाकिस्तानी सेना के अभियानों और अमेरिकी ड्रोन हमलों के बावजूद, पाकिस्तानी तालिबान (TTP) को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका।
- जीत का दावा विफल: 2018 में पाकिस्तान ने TTP पर जीत की घोषणा की थी, लेकिन बाद में यह दावा गलत साबित हुआ, क्योंकि TTP अपनी गतिविधियाँ जारी रखे हुए है।