रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कहा कि सेना के लिए आत्मनिर्भर भारत पहल आवश्यक है। उन्होंने बताया कि पहले संघर्षों के लिए 100 किमी की मारक क्षमता वाले हथियारों की आवश्यकता होती थी, लेकिन अब 300 किमी की मारक क्षमता वाले हथियारों की जरूरत है।अधिकारी ने आगे कहा कि हमारे विरोधी देशों की तकनीक तेजी से विकसित हो रही है। हम अपनी सुरक्षा के लिए हमेशा विदेशी हथियारों पर निर्भर नहीं रह सकते। उन्होंने जोर दिया कि अपनी क्षमताओं पर विश्वास और लगातार अपनी शक्ति को बढ़ाना ही हमें भविष्य के युद्धों के लिए तैयार कर सकता है।एक हालिया ऑपरेशन का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने इसे "चार दिन का टेस्ट मैच" बताया था, लेकिन युद्ध की अवधि का अनुमान लगाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यह ऑपरेशन कितने समय तक चलेगा, क्योंकि युद्ध हमेशा अप्रत्याशित होते हैं। अधिकारी ने यूक्रेन-रूस युद्ध का उदाहरण दिया, जिसके बारे में किसी ने नहीं सोचा था कि यह इतना लंबा खिंचेगा, और ईरान-इराक युद्ध का, जो लगभग 10 साल तक चला था।

भारतीय सेना भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को आधुनिक बना रही है। इस प्रक्रिया में, सेना नई तकनीक वाले हथियारों को शामिल करने पर जोर दे रही है।
आधुनिकीकरण और कल्याण
सेना के लिए नए हेलिकॉप्टरों की खरीद पर भी विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पुराने पड़ चुके चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों को बदलना है। नए हेलिकॉप्टर टोही, निगरानी और सैनिकों को लाने-ले जाने जैसे कार्यों के लिए उपयोग होंगे।सेना प्रमुख का कहना है कि ये सभी प्रयास सैनिकों की जिंदगी को बेहतर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम हैं। आधुनिकीकरण के साथ-साथ सैनिकों के कल्याण को प्राथमिकता देना, सेना के समग्र विकास का एक अभिन्न हिस्सा है।
तकनीक और नवाचार
सेना का लक्ष्य पारंपरिक राइफल से लेजर हथियारों तक जाना है। लेजर हथियार अपने फायदे के लिए जाने जाते हैं, जैसे कि प्रति शॉट कम लागत और सटीकता। ये हथियार ड्रोन और मिसाइलों जैसे खतरों को बेअसर कर सकते हैं।इसके अलावा, सेना में ऐसे मानव रहित टैंक शामिल करने की योजना है जो बिना किसी व्यक्ति के संचालित हो सकें। यह तकनीक सैनिकों को जोखिम से बचाती है और युद्ध के मैदान में एक नई क्षमता जोड़ती है।
