collapse
...

संदिग्ध विस्फोटकों का ठिकाना

Gemini_Generated_Image_byf9jbbyf9jbbyf9
मंडला में उजागर हुआ विस्फोटकों का जखीरा, पुलिस की जांच में नक्सली कनेक्शन की पड़ताल

सर्च ऑपरेशन के दौरान जवानों को नक्सली ठिकानों से अक्सर डेटोनेटर और जिलेटिन जैसे घातक विस्फोटक मिलते हैं। इन सामग्रियों की आपूर्ति नक्सलियों तक किस चैनल से पहुंच रही है, इसी कड़ी को खंगालते हुए पुलिस ने मंडला ज़िले के बीजाडांडी क्षेत्र के डूंगरिया जंगल में बने एक गोदाम तक पहुंच बनाई।

यह गोदाम खेत की जमीन पर बनाया गया था और यहां सुरक्षा मानकों की खुलकर अनदेखी हो रही थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस जखीरे के संचालन के पीछे कौन लोग शामिल थे और क्या इसका सीधा रिश्ता नक्सली गतिविधियों से है।

 साल 2023 में स्थापित यह गोदाम सुरक्षा नियमों की अनदेखी का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। यहां न तो सुरक्षा गार्ड की तैनाती थी, न ही सीसीटीवी कैमरे और न ही चारदीवारी, जिससे यह जगह पूरी तरह असुरक्षित हो गई।

 नागपुर की कंपनी से खरीदे जा रहे थे विस्फोटक, पुलिस ने मांगी डीलरों की पूरी सूची

पुलिस जांच में सामने आया है कि साल 2023 से नर्मदा इंटरप्राइजेस नामक फर्म बोरवेल खनन, स्टोन क्रशर, माइंस और ब्लास्टिंग कार्य करने वाली कंपनियों को लगातार विस्फोटक बेच रही थी। इनकी सप्लाई नागपुर की एक बड़ी सोलर इंडस्ट्री के माध्यम से की जाती थी।

यह सोलर इंडस्ट्री कई राज्यों—जैसे मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान—में कानूनी रूप से विस्फोटकों की आपूर्ति करती रही है। अब पुलिस ने इस कंपनी से डीलरों की पूरी सूची मांगी है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि विस्फोटकों की सप्लाई किन-किन चैनलों तक पहुंच रही थी और क्या इसका इस्तेमाल नियमानुसार हो रहा थापुलिस अधिकारियों के मुताबिक, दो साल के भीतर यह गोदाम खंडहर में तब्दील हो गया है और इसके चारों ओर घनी झाड़ियां उग आई हैं। चिंताजनक बात यह है कि इस जगह से महज 300 मीटर की दूरी पर एक स्कूल है और डेढ़ किलोमीटर पर बसा हुआ गांव, जिससे स्थानीय लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।

एक्सपायर विस्फोटक बने खतरा, लापरवाही से हो सकता है बड़ा हादसा

विस्फोटक अधिनियम के तहत इनके इस्तेमाल की एक निश्चित समय सीमा तय होती है। समय सीमा खत्म होने पर सामान्यत: इनका असर घट जाता है, लेकिन कई बार यही सामग्री जानलेवा साबित हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे विस्फोटक यदि गलत तरीके से रखे जाएं या बिजली जैसी किसी चिंगारी के संपर्क में आ जाएं तो अनियंत्रित ब्लास्ट की संभावना रहती है। यही कारण है कि एक्सपायर विस्फोटकों को पूरी तरह निष्क्रिय मान लेना गंभीर गलती हो सकती है। इन्हें सुरक्षित तरीके से नष्ट करना ही एकमात्र समाधान है।


Share: