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ठोस एक्शन से जीती जाती है जंग

डुंडीगल (तेलंगाना)।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि युद्ध न तो बयानबाज़ी से जीता जाता है और न ही सोशल मीडिया प्रचार से, बल्कि इसके लिए स्पष्ट लक्ष्य, ठोस रणनीति और निर्णायक कार्रवाई जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की सैन्य ताकत का आकलन शब्दों से नहीं, बल्कि अनुशासन, योजना और अमल से होता है।

CDS जनरल चौहान तेलंगाना के डुंडीगल स्थित एयर फोर्स अकादमी में आयोजित ऑटम टर्म दिसंबर 2025 की कंबाइंड ग्रेजुएशन परेड को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने नए पासिंग-आउट अधिकारियों को मौजूदा सुरक्षा हालात को ध्यान में रखते हुए सतर्क रहने का संदेश दिया।

पाकिस्तान पर बिना नाम लिए तीखा कटाक्ष

अपने संबोधन में जनरल चौहान ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि पड़ोसी देश द्वारा बार-बार जीत के झूठे दावे और डिजिटल प्रचार देखने को मिलते हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई अक्सर उससे अलग होती है। उन्होंने कहा कि प्रतीकात्मक दावे किसी भी सेना को मजबूत नहीं बनाते।

उन्होंने कहा,
“खाली शब्दों और दिखावटी दावों से ताकत साबित नहीं होती। किसी भी सैन्य शक्ति की असली पहचान अनुशासन, ठोस योजना और निर्णायक कार्रवाई से होती है।”

ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बीच नई पीढ़ी की जिम्मेदारी

CDS ने कहा कि नए अधिकारी ऐसे समय में सेवा में आ रहे हैं, जब देश एक संवेदनशील सुरक्षा दौर से गुजर रहा है और ऑपरेशन ‘सिंदूर’ जारी है। ऐसे माहौल में लगातार चौकन्नापन, तेज प्रतिक्रिया और उच्च स्तर की तैयारी ही सफलता की कुंजी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सैन्य सेवा केवल संकट के समय सक्रिय नहीं होती, बल्कि हर दिन की तैयारी ही भविष्य की जीत तय करती है

पेशेवर रवैया ही असली शक्ति

जनरल चौहान ने कहा कि

  • सतर्कता और तत्परता केवल युद्ध के समय नहीं, बल्कि पूरे सेवा काल में जरूरी है।

  • भारत की सामरिक मजबूती उसके मजबूत संस्थानों, लोकतांत्रिक स्थिरता और सशस्त्र बलों की पेशेवर क्षमता पर आधारित है।

उन्होंने नए अधिकारियों से कहा कि उन्हें बदलते युद्ध परिदृश्य के अनुसार खुद को लगातार अपडेट रखना होगा।

युद्ध के तरीके तेजी से बदल रहे हैं

इससे पहले 29 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित चाणक्य डिफेंस डायलॉग में CDS ने कहा था कि युद्ध के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। जो रणनीतियां आज भविष्य की लगती हैं, वे लागू होने से पहले ही पुरानी हो सकती हैं। ऐसे में सेना के लिए भविष्य की जंग को समझना और उसके अनुसार तैयारी करना अस्तित्व का सवाल बन चुका है

1962 युद्ध से सबक

जनरल चौहान ने 25 सितंबर को 1962 के भारत-चीन युद्ध का जिक्र करते हुए कहा था कि उस समय एयरफोर्स के प्रभावी इस्तेमाल की अनुमति नहीं मिली, जिससे भारत को रणनीतिक नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि इतिहास से सबक लेकर ही भविष्य की गलतियों से बचा जा सकता है।

स्पष्ट संदेश

CDS के इस संबोधन का सार साफ है—
भारत को शब्दों की नहीं, बल्कि सतर्कता, तैयारी और निर्णायक कार्रवाई की जरूरत है।
यही सोच आने वाले समय में देश की सुरक्षा और सैन्य सफलता का आधार बनेगी।


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